भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 582, कुल 638 में से

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५६४ ग्रहों की युति जन्मकुण्डली के किसी एक ही भाव में यदि एक से अधिक—दो, तीन, चार, पाँच, छै या सात—ग्रह बैठे हों तो उसे ग्रहों की युति कहा जाता है । विभिन्न भावों में अलग-अलग बैठे हुए ग्रह के सामान्य-फलादेश की अपेक्षा ग्रहों की युति के फलादेश में बहुत अन्तर आ जाता है, अतः ग्रहों की युति के फलादेश की अलग से जानकारी प्राप्त होना अत्यावश्यक है । प्रस्तुत प्रकरण में सर्वप्रथम 'ग्रहों की युति' के फलादेश का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है । आगे दी गई सभी उदाहरण-कुण्डलियां मेष-लग्न की हैं, जिनमें विभिन्न ग्रहों की युति को प्रदर्शित किया गया है, साथ ही उनके फलादेश का उल्लेख भी किया गया है। परन्तु विभिन्न व्यक्तियों की कुण्डलियां विभिन्न लग्नों की होती हैं तथा ग्रहों की युति भी विभिन्न भावों में पाई जाती है, अतः इन उदाहरण- कुण्डलियों को केवल आधार के रूप में ही ग्रहण करना चाहिए तथा ग्रहों की युति के सही फलादेश का निर्णय करते समय उनकी उच्च-नीच, मित्र-शत्रु एवं स्वराशिगत स्थिति, उन पर पड़ने वाली अन्य ग्रहों की दृष्टि आदि सभी बातों पर विचार करने के बाद ही निष्कर्ष-स्वरूप उचित फलादेश का निर्णय करना चाहिए । ग्रहों की युति के फलादेश में राहु-केतु को स्थान न देकर, केवल मुख्य सात ग्रहों की युति का ही उल्लेख किया गया है । राहु-केतु मित्र भाव में मित्र-ग्रह के घर में बैठे होते हैं, उनके प्रभाव को बढ़ाते हैं और शत्रु-ग्रह के रूप में बैठे होते हैं तो उनके प्रभाव को घटाते हैं—यह सामान्य सिद्धान्त है । राहु-केतु स्वयं कभी एक साथ नहीं बैठते—ये छाया-ग्रह होने के कारण सदैव एक-दूसरे से सातवें स्थान पर ही रहते हैं । विशेष-ज्ञातव्य ग्रहो की युति के फलादेश के सम्बन्ध में निम्नलिखित बातों को भी विशेष रूप से ध्यान में रखना चाहिए— (१) यदि जन्म के समय तीन शुभ ग्रहों की युति हो तो जातक का जीवन सुखी रहता है, परन्तु यदि तीन पाप-ग्रहों की युति हो तो जातक जीवन-भर दुःखी तथा सर्वत्र निन्दित रहता है । (२) पाँच अथवा छै ग्रहों की युति के फलस्वरूप जातक प्रायः दरिद्र तथा मूर्ख होता है । (३) तीन ग्रहों की युति वाली कुण्डली में यदि चन्द्रमा किसी पाप-ग्रह के साथ हो तो जातक की माता की मृत्यु होने की आशंका रहती है। यदि सूर्य पाप ग्रह

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