भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 597, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें६०७ बुध : शुक्र : शनि (३४) बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक चुगलखोर, पर-स्त्रीगामी, धूर्त, मिथ्यावादी, दुरा- चारी, धैर्यवान्, स्वदेश-प्रेमी, नीच लोगों के साथ रहने वाला, दूर देशों की यात्रा करने वाला तथा कलाओं का ज्ञाता होता है। गुरु : शुक्र : शनि (३५) गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक नीच कुल में जन्म लेने पर भी धनी, यशस्वी, सुशील कीर्तिवान्, भूस्वामी, राजा-जैसा प्रतापी तथा निर्मल हृदय वाला होता है। वह अत्यन्त यश भी प्राप्त करता है। चार ग्रहों की युति का फलादेश सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध (१) सूर्य, चन्द्र, मंगल और बुध की युति हो तो जातक मायावी, चुगलखोर बकवादी, लेखक, चित्र- कार, चोर, भाषा पर अधिकार रखनेवाला, सब काम करने में कुशल तथा मुख-रोगी होता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु (२) सूर्य, चन्द्र, मंगल और गुरु की युति हो तो जातक शिल्पज्ञ, बलवान्, कार्य-कुशल, धनवान्, नीतिज्ञ, तेजस्वी, शोक-रहित, बड़ी आंखों वाला तथा स्वर्ण-जैसे कान्तिमान् शरीर वाला होता है।