भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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६०६ मंगल : गुरु : शनि (३०) मंगल, गुरु और शनि की युति हो तो जातक दुराचारी, कृश-शरीर निर्धन, कुकर्मी, मित्रों द्वारा निन्दित परन्तु राजा का कृपापात्र होता है। मंगल : शुक्र : शनि, (३१) मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक अच्छे स्वभाव वाला, परदेश में रहने वाला, सदैव दुःख भोगने वाला तथा स्त्री के सुख से रहित होता है। बुध : गुरु : शुक्र (३२) बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक सत्यवादी, परम यशस्वी, सदैव प्रसन्न रहने वाला, शत्रु- हन्ता, सुन्दर तथा राजा द्वारा सम्मानित होता है। बुध : गुरु : शनि (३३) बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक अत्यन्त धनी, शीलवान्, भाग्यवान्, धैर्यवान्, पण्डित, सुखी, श्रेष्ठ वस्त्राभूषणों वाला तथा श्रेष्ठ स्त्री का पति होता है।