भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६०५ मंगल : बुध : गुरु
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(२६) मंगल, बुध और गुरु की युति हो तो जातक प्रतापी, परोपकारी, संगीतज्ञ, श्रेष्ठ कवि, स्त्रियों को प्रिय, परहित-साधक तथा अपने कुल में श्रेष्ठ होता है। मंगल : बुध : शुक्र
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(२७) मंगल, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक दुर्बल शरीर वाला, बहुत बोलने वाला, हीन कुल में उत्पन्न, अंगहीन, अत्यन्त उत्साही, ढीठ, धनी, चंचल तथा संतुष्ट स्वभाव का होता है। मंगल : बुध : शनि
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(२८) मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक दुर्बल शरीर वाला, बुरे नेत्रों वाला, नेत्र-रोगी, मुख-रोगी, अत्यधिक कष्ट भोगने वाला, डरपोक, सहिष्णु, हास्य प्रिय, वन में रहने की इच्छा रखनेवाला, परदेश में रहने वाला तथा दूत-कर्म करने वाला होता है। मंगल : गुरु : शुक्र,
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(२९) मंगल, गुरु और शुक्र की युति तो जातक सुखी, सब को प्रसन्नता देने वाला, राजा का प्रिय, श्रेष्ठ लोगों द्वारा सम्मानित तथा उत्तम स्त्री-पुत्रों वालः होता है।