भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 594, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 594

६०४ चन्द्र : बुध : शनि (२२) चन्द्र, बुध और शनि की युति हो तो जातक श्रेष्ठ बुद्धि वाला, कला-कुशल, महाविद्वान्, पण्डित, प्रिय- वादी, विनम्र, विश्व-प्रसिद्ध, लम्बे शरीरवाला, ग्राम का अधिपति तथा राजाओं को प्रिय होता है। १४६६ चन्द्र : गुरु : शुक्र (२३) चन्द्र, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक विद्वान्, मंत्रज्ञ, चतुर, कला-कुशल, राजाओं को प्रिय तथा सुन्दर शरीर वाला होता है। उसकी माता अत्यन्त सुशील होती है। १४६७ चन्द्र : गुरु : शनि (२४) चन्द्र, गुरु और शनि की युति हो तो जातक अत्यन्त चतुर, व्यवहार-कुशल, स्त्रियों को प्रिय, शास्त्रज्ञ, राजा द्वारा सम्मानित, उच्च अधिकारी तथा स्वस्थ शरीर वाला होता है। १४६८ चन्द्र : शुक्र : शनि (२५) चन्द्र, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक वेदज्ञ, धर्मात्मा, श्रेष्ठ पुरोहित, चित्रकार, लेखक तथा सुन्दर शरीर वाला होता है। १४६९