भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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६०३ चन्द्र : मंगल : शुक्र (१८) चन्द्र, मंगल और शुक्र की युति हो तो जातक चंचल स्वभाव वाला, निरन्तर भ्रमणशील, कुशील तथा शीत से डरने वाला होता है। उसकी माता तथा पत्नी दुष्ट स्वभाव वाली होती हैं तथा पुत्र शीलवान् होता है। चन्द्र, मंगल, शनि (१९) चन्द्र, मंगल और शनि की युति हो तो जातक कुटिल, लोक-द्वेषी, कलह-प्रिय, क्षुद्र स्वभाव वाला तथा सदैव दुःखी रहने वाला होता है। माता का उसकी बाल्यावस्था में ही देहावसान हो जाता है। चन्द्र : बुध : गुरु (२०) चन्द्र, बुध और गुरु की युति हो तो जातक बुद्धिमान्, भाग्यवान्, धनवान्, यशस्वी, तेजस्वी, अत्यन्त प्रसिद्ध, कुशल वक्ता, श्रेष्ठ मनोवृत्ति वाला तथा स्त्री, पुत्र- मित्र आदि के सुख से युक्त होता है। चन्द्र : बुध : शुक्र (२१) चन्द्र, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक बड़ा विद्वान्, ईर्ष्यालु, दुराचारी, धन का लोभी, नीच कर्म द्वारा आजीविका उपार्जित करने वाला तथा श्राद्ध के विषय में अधिक श्रद्धालु होता है।