भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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६०६ सूर्य, चन्द्र, बुध, शनि (७) सूर्य, चन्द्र, बुध और शनि की युति हो तो जातक निर्धन, दरिद्र, कुटुम्ब-हीन, विकलांग, नेत्र-रोगी, माता-पिता से हीन तथा भिक्षुक होता है। सूर्य, चन्द्र, गुरु, शुक्र (८) सूर्य, चन्द्र, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक सुखी, गुणी, राजाओं द्वारा सम्मानित तथा जल, गुरु एवं वन में प्रीति रखने वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, गुरु, शनि (९) सूर्य, चन्द्र, बुध और शनि की युति हो तो जातक यशस्वी, धनी, प्रतापी, सर्वत्र सम्मानित, सुन्दर नेत्रों वाला, पतले शरीर वाला, स्त्रियों का प्रिय तथा बहुत पुत्रों वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, शुक्र, शनि (१०) सूर्य, चन्द्र, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक डरपोक, अत्यन्त दुर्बल शरीर वाला, स्त्रियों-जैसा आचरण करने वाला, परन्तु अन्य लोगों का अगुआ (नेता) होता है।