भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 600, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 600

६१० सूर्य, मंगल, बुध, बुध (११) सूर्य, मंगल, बुध और गुरु की युति हो तो जातक विजयी, शूरवीर, चक्रधारी, देवता- ब्राह्मणों का सेवक, पर-स्त्रीगामी तथा कुशल बुध- निर्माता या गुरु का व्यवसायी होता है । १४६० सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र (१२) सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक चोर, दुर्जन, निलंज्ज, पर- स्त्रीगामी, विषम अंगों वाला परन्तु देवता और ब्राह्मणों का पूजक तथा सदैव विजय पाने वाला होता है । १४६१ सूर्य, मंगल, बुध, शनि (१३) सूर्य, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक प्रतापी, धनि, योद्धा, मन्त्री अथवा राजा, अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञाता, नीच पुरुषों की संगति में रहने वाला तथा नीच आचरण करने वाला होता है । १४६२ सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र (१४) सूर्य, मंगल, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक अत्यन्त धनी, यशस्वी, नीतिज्ञ, मनुष्यों का पालक, सुन्दर शरीर वाला तथा राजा द्वारा सम्मानित होता है । १४६३

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक) · पृष्ठ 600, कुल 638 में से · BharatKosha