भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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६११ सूर्य, मंगल, गुरु, शनि (१५) सूर्य, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक दयालु, धनी, मनुष्यों में श्रेष्ठ, सुप्रसिद्ध सेनापति, मन्त्री, अन्न का संचय करने वाला, राजा द्वारा पूजित तथा सब कामों में सफलता पाने वाला होता है। १४६४ सूर्य, मंगल, शुक्र, शनि (१६) सूर्य, मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक दुराचारी, मूर्ख, कटुभाषी, नीच कर्म करनेवाला, जन-द्रोही, मांसाहारी तथा नीच जाति के मनुष्यों तो साथ रखने वाला होता है। १४६५ सूर्य, बुध, बुध, शुक्र (१७) सूर्य, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक बुद्धिमान्, धनवान्, सुखी, प्रसन्न, विनयी, मानी, स्त्री-पुत्रादि के सुख से युक्त तथा सब कामों में सफलता पाने वाला होता है। १४६६ सूर्य, बुध, गुरु, शनि (१८) सूर्य, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक झगड़ालू, उद्योगहीन, निन्दित कर्म करने वाला, नपुंसक-जैसा तथा बहुत-से भाइयों वाला होता है। १४६७