भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१२ सूर्य, बुध, शुक्र, शनि (१६) सूर्य, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक पवित्र हृदय वाला, सुन्दर, विद्वान्, पण्डित, सुवक्ता, उच्च विचारों वाला, भाग्यशाली, सुखी, भाइयों द्वारा सम्मानित, मित्रों वाला तथा स्त्री-पुत्रादि के सुख से युक्त होता है। १४९८ सूर्य, गुरु, शुक्र, शनि (२०) सूर्य, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक सुखी, कवि, शिल्पज्ञ, करुणा से पूरित हृदय वाला, राजा का प्रिय, परन्तु लोभी और परम कृपण होता है। १४९९ चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु (२१) चन्द्र, मंगल, गुरु और गुरु की युति हो तो जातक परम विद्वान्, बुद्धिमान्, सत्यवादी, शास्त्रज्ञ, लोक से पूजित, सुखी जीवन व्यतीत करने वाला, मनुष्यों में श्रेष्ठ तथा राजा का कृपापात्र होता है। १५०१ चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र (२२) चन्द्र, मंगल, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक झगड़ालू, नीच प्रकृति का, बन्धु-विरोधी, भ्रातृ द्रोही, वेद-शास्त्र-निन्दक, नींद में समय बिताने वाला तथा नीच मनुष्यों से प्रेम रखने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति की स्त्री कुलटा होती है। १५०२