भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१३ चन्द्र, मंगल, बुध, शनि (२३) चन्द्र, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक सुखी, साहसी, स्त्री, पुत्र तथा मित्रादि से युक्त, दो माताओं वाला तथा वीर-वंश में जन्म लेने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र (२४) चन्द्र, मंगल, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक धनी, मानी, पण्डित, साहसी, नीतिज्ञ, पुत्रवान्, अंगहीन तथा व्याकुल रहने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, गुरु, शनि (२५) चन्द्र, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक धनवान्, शूर-वीर, पण्डित, सत्यवादी, दयालु, उन्मादी, वचन का पालक, राजा द्वारा सम्मानित परन्तु नीच मनुष्यों के साथ रहने वाला होता है। चन्द्र, मंगल, शुक्र, शनि (२६) चन्द्र, मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक कुल-कलंक, महा ढीठ, सब का शत्रु, दरिद्री, उद्वेगी, जुआरी, मलिन, सर्प-जैसी आँखों वाला, मद्य-मांस आदि का सेवी तथा वीर- वंश में जन्म लेकर भी कायर स्वभाव का होता है। उसकी स्त्री कुलटा होती है।