भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शनि (१२) सूर्य, मंगल, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक भिक्षुक, अल्पधनी, जर्जर, मलिन, रोगी, अङ्क, पुत्रवान् तथा उद्विग्न चित्त वाला होता है। सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र, शनि (१३) सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक दुःखी, स्थान-भ्रष्ट, कुत्सित, दरिद्री, रोगी तथा शत्रुओं से त्रस्त होता है। सूर्य, मंगल, गुरु, शुक्र, शनि (१४) सूर्य, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक विद्वान्, विचारवान्, तपस्वी, धनी भाई-बन्धुओं से युक्त तथा धातु, यंत्र अथवा रसायन के काम में प्रवीण होता है। वह प्रसिद्धि भी प्राप्त करता है। सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र, शनि (१५) सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक दयालु, धर्मात्मा, धनी, शास्त्रज्ञ, सुवक्ता, सेनापति, मित्रों का प्रिय तथा माता-पिता और गुरु का भक्त होता है।