भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 608, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 608

६१८ सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु, शनि (८) सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक ऋणग्रस्त, कायर, उन्मादी, उग्र- स्वभावी, वेश्यागामी, दुष्ट कर्म करने वाला, परान्न पर निर्वाह करने वाला, धूर्त तथा अपने मित्रों से कारण दुःख पाने वाला होता है । १४२२ सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र, शनि (९) सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक उत्साही एवं धन, सन्तान, मित्र एवं सुखों से हीन, रोगी शरीर वाला होता है । उसके शरीर पर रोयें अधिक होते हैं तथा कद लम्बा होता है । १४२३ सूर्य, चन्द्र, गुरु, शुक्र, शनि (१०) सूर्य, चन्द्र, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक पण्डित, समर्थ, निर्भय, चंचल, ऐन्द्रजालिक, सुवक्ता, पापी, वाक्छल में प्रवीण, स्त्रियों का प्रिय तथा शत्रुओं द्वारा पीड़ित होता है । १४२४ सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र (११) सूर्य, -मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक धीर, समर्थ, सुन्दर, स्वच्छ, यशस्वी, धन-धान्य तथा सेवकों से युक्त, बहुत घोड़े रखने वाला, सेनापति तथा राजा का प्रिय होता है । १४२५

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक) · पृष्ठ 608, कुल 638 में से · BharatKosha