भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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६१७ सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र (४) सूर्य, चन्द्र, मंगल गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक दुःखी, नेत्र-रोगी अथवा जन्मान्ध, माता-पिता के सुख से रहित, संगीतज्ञ तथा हाथी से प्रेम रखनेवाला होता है। सूर्य. चन्द्र, मंगल, गुरु, शनि (५) सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु और शनि की युति हो तो जातक व्यसनी, दुष्ट, झगड़ालू, डरपोक, दूसरों को दुःख देनेवाला, परधनपहारी, सज्जनों का शत्रु तथा वृक्ष-जैसी आकृति वाला होता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, शुक्र, शनि (६) सूर्य, चन्द्र, मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धनहीन, अधर्मी, सब का द्वेषी, परस्त्रीगामी तथा आचार-विचार से हीन होता है। सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र (७) सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक धनी, यशस्वी, चतुर, राजा द्वारा सम्मानित, न्यायाधीश, राज्य-मंत्री तथा सर्वत्र प्रशंसित होता है।