भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 606, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें६१६ बुध, गुरु, शुक्र, शनि (३५) बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक मेधावी, वेद-वेदांग का ज्ञाता, शस्त्र- विद्या का प्रेमी परन्तु विषय-वासना में लीन रहने वाला कामी होता है। पाँच ग्रहों की युति का फलादेश सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बुध (१) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध और गुरु की युति हो तो जातक दुष्ट, क्रोधी, छली तथा सदैव दुःखी रहने वाला होता है। उसकी पत्नी दुष्ट स्वभाव वाली होती है, जिसके कारण वह सदैव उद्विग्न बना रहता है। ऐसा व्यक्ति स्त्री-हीन भी हो सकता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र (२) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध और शुक्र की युति हो तो जातक मिथ्यावादी, दयालु स्वभाव का, बुद्धि-हीन, दूसरों का काम करने वाला तथा हिजड़ों- जैसी आकृति का होता है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शनि (३) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध और शनि की युति हो तो जातक चोर, सदैव दुःखी, स्त्री-पुत्रादि से रहित, बन्धन (जेल या कैद) प्राप्त करने वाला तथा प्रायः अल्पायु होता है।