भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१५ मंगल, बुध, गुरु, शुक्र [कुण्डली १४१० : लग्न में मं. १, बु., गु., शु.] (३१) मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक सुशील, धनी, दयालु, राज-मान्य, स्वस्थ, लोकप्रिय, परन्तु अपनी स्त्री से कलह करने वाला होता है। मंगल, बुध, गुरु, शनि [कुण्डली १४११ : लग्न में मं. १, बु., गु., श.] (३२) मंगल, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक सत्यवादी, पवित्र-हृदय, विनम्र, धैर्यवान्, विद्वान् सुवक्ता, शूर-वीर परन्तु धनहीन होता है। मंगल, बुध, शुक्र, शनि [कुण्डली १४१२ : लग्न में मं. १, बु., शु., श.] (३३) मंगल, बुध, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक मधुरभाषी, मल्ल-विद्या में निपुण, लोक-प्रसिद्ध, पुष्ट शरीर वाला तथा कुत्तों को पालने वाला होता है। मंगल, गुरु, शुक्र, शनि [कुण्डली १४१३ : लग्न में मं. १, गु., शु., श.] (३४) मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धूर्त, विषयी, मानी, विनम्र, साहसी विद्वान्, धनी, पर-स्त्रीगामी तथा श्रेष्ठ मनुष्यों को प्रिय होता है।