भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 614, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 614

६२४ (२) जिस स्त्री के जन्म-काल में लग्न तथा चन्द्रमा विषम राशि पर हों (चित्र १५४५), वह पुरुष-जैसे आकार वाली होती है। (३) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा सम-राशि पर हों और उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४६), वह श्रेष्ठ शीलवती तथा सुन्दर वस्त्राभूषणों को धारण करने वाली होती है। (४) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा विषम-राशि पर हों और उन पर पाप-ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४७), वह पापिष्ठ तथा बुरे कर्म करने वाली होती है। (५) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा विषम-राशि पर हों और उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४८), तो उसे मध्यम स्वभाव वाली समझना चाहिए।