भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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६२५ (६) जिस स्त्री के लग्न तथा चन्द्रमा सम-राशि पर हों और उस पर पाप-ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित्र १५४६), तो उसे भी मध्यम स्वभाव वाली समझना चाहिए । टिप्पणी : जो ग्रह अधिक बली हो, उसी के अनुसार स्त्री का स्वभाव समझना चाहिए । (७) जिस स्त्री की कुण्डली में जन्म-लग्न अथवा चन्द्रमा से सातवें घर में कोई भी ग्रह न बैठा हो, अथवा निर्बल ग्रह बैठा ही (चित्र १५५०), उसका पति निरुद्यमी होता है । (८) जिस स्त्री की कुण्डली में जन्म-लग्न अथवा सातवें घर पर शत्रु-ग्रहों की दृष्टि न हो (चित्र १५५१), उसका पति भी निरुद्यमी होता है । (६) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सातवें घर में बुध तथा शनि बैठे हों (चित्र १५५२), उसका पति नपुंसक होता है ।