भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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६३४ (१२) यदि सूर्य सिंह राशि में, मगल मकर में, शनि कुम्भ में तथा चन्द्रमा मीन राशि में हो तथा लग्न भी मीन ही हो तो ऐसा जातक महाराजा होता है। (१३) यदि मंगल मेष राशि का होकर लग्न में बैठा हो तो ऐसा जातक राजा होता है। (१४) गुरु कर्क लग्न में हो तथा मगल मेष राशि का होकर दशमभाव में बैठा हो तो ऐसा जातक राजनीतिज्ञ एवं शत्रु-जयी राजा होता है। (१५) बृहस्पति उच्च का होकर लग्न में बैठा हो, दशम भाव में मेष का सूर्य हो तथा एकादश भाव में शनि, शुक्र और बुध तीनों बैठेहों, तो ऐसा जातक अत्यन्त पराक्रमी राजा होता है।