भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 626, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 626

६३६ (२०) कर्क का गुरु लग्न में हो तथा सप्तम, चतुर्थ अथवा दशम स्थान में शुक्र, शनि और मंगल हों, तो ऐसा व्यक्ति अत्यन्त प्रतापी राजा होता है। (२१) वृष का चन्द्रमा लग्न में हो तथा चतुर्थ सप्तम एवं दशम भाव में सूर्य, गुरु तथा शनि बैठे हों, तो ऐसा व्यक्ति अत्यन्त प्रतापी एवं यशस्वी राजा होता है। (२२) गुरु, चन्द्र, बुध तथा शुक्र, लग्न, तृतीय, नवम एवं एकादश भाव में बैठे हों, तथा मकर का शनि लग्न में बैठा हो तो ऐसा व्यक्ति राजाधिराज होता है। (२३) मीन राशि का शुक्र बुध के साथ लग्न में बैठा हो, मकर का मंगल हो तथा गुरु एवं चन्द्रमा धनु राशि के हों, तो ऐसा जातक चक्रवर्ती राजा होता है।