भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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६३७ (२४) बुध उच्च का होकर केन्द्र में बैठा हो तथा शुक्र दशम भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति परम यशस्वी राजा होता है। (२५) मेष के बुध तथा सूर्य लग्न में हों, मंगल दशम भाव में तथा शुक्र, बुध एवं चन्द्रमा नवम भाव में हों तो ऐसा जातक दिग्विजयी राजा होता है। (२६) मेष में सूर्य, कर्क में गुरु और तुला में शनि तथा चन्द्रमा हों तो ऐसा व्यक्ति बहुत बड़ा राजा होता है। (२७) द्वितीय भाव में सूर्य हो तथा शुक्र, बुध एवं चन्द्रमा केन्द्र में हों परन्तु वे न तो अस्त हों और न शत्रु-ग्रहों द्वारा दृष्ट ही हों, तो ऐसा जातक शत्रुजयी एवं अत्यन्त प्रतापी राजा होता है।