भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
DevanagariHindipublished638 पृष्ठ
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६३८ (२८) कर्क में गुरु, मेष में सूर्य, मीन में शुक्र तथा वृष में चन्द्रमा हो और वह शनि द्वारा दृष्ट भी हो, तो ऐसा व्यक्ति अत्यन्त प्रतापी राजा होता है। (३६) पंचम भाव में बुध, शुक्र तथा गुरु हों, परन्तु वे अस्त न हों, मकर का मंगल तुला से रहित हो तथा नवम भाव में शनि बैठा हो, तो ऐसा जातक राजा- धिराज होता है। (३०) गुरु तथा शुक्र चतुर्थ भाव में हों तो ऐसा जातक धनी, पराक्रमी एवं पृथिवीपति होता है। (३१) कर्क राशि में गुरु के साथ चन्द्रमा बैठा हो तो ऐसा जातक कश्मीर देश का राजा होता है।