भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
DevanagariHindipublished638 पृष्ठ
पृष्ठ 629, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 629
६३६ (३२) उच्च राशिस्थ चन्द्रमा बुध के साथ बैठा हो तो जातक मगध देश का राजा होता है। यदि चन्द्रमा बलवान् हो तो जातक किसी भी अन्य स्थान का राजा हो सकता है। १६०४ (३३) जन्म-राशि का स्वामी लग्न में हो तथा लग्नेश बली होकर केन्द्र में बैठा हो तो नीच कुल में उत्पन्न व्यक्ति तो राजा होता है। १६०५ (३४) मेष का सूर्य चन्द्रमा के साथ बैठा हो तो ऐसा जातक राजा होता है। १६०६ (३५) गुरु तथा शुक्र उच्च राशिस्थ होकर केन्द्र अथवा त्रिकोण में बैठे हों, तो ऐसा जातक राजा अथवा राजमंत्री होता है। १६०७