भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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६४७ पंचधा मैत्री-चक्र
| सूर्य | चन्द्र | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अधिमित्र | चन्द्र, मंगल | सूर्य, बुध | सूर्य, चन्द्र | शुक्र, चन्द्र | बुध | ||
| मित्र | गुरु | मंगल, शुक्र | शनि | शनि | गुरु | ||
| सम | शुक्र | गुरु, बुध | सूर्य, मंगल | शुक्र, चन्द्र, मंगल | सूर्य, चन्द्र, शनि | बुध, मंगल, शुक्र | |
| शत्रु | बुध | गुरु, शनि | शुक्र | गुरु, शनि | मंगल, बुध | ||
| अधिशत्रु | शनि | बुध, शुक्र | सूर्य, चन्द्र | ||||
| कुण्डली चक्र (तुला लग्न - ७): |
- प्रथम भाव (तनु): ७
- द्वितीय भाव (धन): ८
- तृतीय भाव (सहज): ९
- चतुर्थ भाव (सुख): १०
- पञ्चम भाव (सुत): ११
- षष्ठ भाव (रिपु): १२
- सप्तम भाव (जाया): १
- अष्टम भाव (आयु): २
- नवम भाव (भाग्य): ३
- दशम भाव (कर्म): ४
- एकादश भाव (लाभ): ५
- द्वादश भाव (व्यय): ६ १६३५