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भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

६४७ पंचधा मैत्री-चक्र

सूर्यचन्द्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनि
अधिमित्रचन्द्र, मंगलसूर्य, बुधसूर्य, चन्द्रशुक्र, चन्द्रबुध
मित्रगुरुमंगल, शुक्रशनिशनिगुरु
समशुक्रगुरु, बुधसूर्य, मंगलशुक्र, चन्द्र, मंगलसूर्य, चन्द्र, शनिबुध, मंगल, शुक्र
शत्रुबुधगुरु, शनिशुक्रगुरु, शनिमंगल, बुध
अधिशत्रुशनिबुध, शुक्रसूर्य, चन्द्र
कुण्डली चक्र (तुला लग्न - ७):
  • प्रथम भाव (तनु): ७
  • द्वितीय भाव (धन): ८
  • तृतीय भाव (सहज): ९
  • चतुर्थ भाव (सुख): १०
  • पञ्चम भाव (सुत): ११
  • षष्ठ भाव (रिपु): १२
  • सप्तम भाव (जाया): १
  • अष्टम भाव (आयु): २
  • नवम भाव (भाग्य): ३
  • दशम भाव (कर्म): ४
  • एकादश भाव (लाभ): ५
  • द्वादश भाव (व्यय): ६ १६३५

सम्पूर्ण 1635 कुण्डलियों से युक्त भृगु-संहिता फलित-दर्पण (फलित-प्रकाश) Bhrigu-Sanhita Phalit-Darpan (Phalit-Prakash)