भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७६ दैनिक ग्रहगोचर का प्रभाव जन्मकुण्डली जातक के जन्मकालीन ग्रहों की स्थिति की परिचायक होती है तथा उन ग्रहों की स्थिति का जातक के जीवन पर स्थायी प्रभाव पड़ता रहता है, परन्तु आकाशमण्डल में विभिन्न ग्रह निरन्तर भ्रमण करते रहते हैं जिनका तात्कालिक-अस्थायी प्रभाव भी जातक के दैनिक-जीवन पर पड़ता रहता है। इस प्रकार प्रत्येक ग्रह प्रत्येक प्राणी के जीवन पर अपना दो प्रकार से प्रभाव डालता है। अस्तु, स्थायी प्रभाव के साथ ही ग्रहों के अस्थायी प्रभाव का विचार करना भी आवश्यक होता है। दैनिक ग्रह गोचर में किस समय कौनसा ग्रह किस स्थान पर चल रहा है, इसका ज्ञान 'पंचांग' द्वारा प्राप्त किया जाता है। इस विषय की जानकारी किसी ज्योतिषी से पूछ कर, अथवा एतद् विषयक हमारी अन्य पुस्तकों का अध्ययन करके प्राप्त की जा सकती है। इस पुस्तक के द्वितीय खण्ड में जन्मकुण्डली के जिस भाव तथा राशि में स्थित स्थायी ग्रहों के जिस फलादेश का उल्लेख किया गया है, दैनिक ग्रहगोचर कुण्डली के विभिन्न भावों तथा राशियों में स्थित विभिन्न ग्रहों का फलादेश भी ठीक वैसा ही होता है। किस दिन, मास अथवा वर्ष में दैनिक ग्रह गोचरस्थ ग्रहों का फलादेश किस उदाहरण कुण्डली द्वारा ज्ञात करना चाहिए, इसका उल्लेख द्वितीय खण्ड में प्रत्येक लग्न की उदाहरण-कुण्डलियों का फलादेश आरम्भ करने से पूर्व ही कर दिया गया है। जन्म कुण्डलीस्थ ग्रह के स्थायी तथा दैनिक ग्रहगोचर के अस्थायी फलादेश के समन्वय स्वरूप जो भी निष्कर्ष निकले, उसी को सच्चा फलादेश समझना चाहिए। 'वर्ष कुण्डली' स्थित ग्रहों के फलादेश का ज्ञान भी जन्मकुण्डली स्थित ग्रहों के फलादेश की भाँति इसी पुस्तक की सहायता द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। वर्षकुण्डली स्थित 'मुंथा' एवं 'वर्षेश' के विशिष्ट फलादेश के विषय में किसी ज्योतिषी द्वारा जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। अथवा हमारी लिखी पुस्तक 'वर्षकुण्डली फल विचार' का अध्ययन करना चाहिए। सम्मिलित परिवार का फलादेश सम्मिलित परिवार होने पर उस परिवार के सभी सदस्यों की जन्मकुण्डली के ग्रहों का थोड़ा-बहुत प्रभाव एक दूसरे पर पड़ता रहता है। अतः सम्मिलित-परिवार के किसी सदस्य के विषय में ग्रहों का फलादेश ज्ञात करते समय यदि उस परिवार के अन्य सदस्यों की जन्मकुण्डलियों का भी सम्यक् अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला जाय तो उचित रहेगा। इस पुस्तक की सहायता से किसी भी स्त्री, पुरुष, बालक, युवा अथवा वृद्ध मनुष्य की जन्मकुण्डलीस्थ ग्रहों के शुभाशुभ प्रभाव की जानकारी सरलतापूर्वक प्राप्त की जा सकती है।