भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७७ गलत जन्मकुण्डली का संशोधन जन्मकुण्डलीस्थ ग्रहों के फलादेश की यथार्थता शुद्ध लग्न पर निर्भर करती है। यदि लग्न ठीक न होगी तो जन्मकुण्डली के ग्रहों का फलादेश भी ठीक नहीं बैठेगा। शुद्ध 'लग्न' का निर्णय जातक के ठीक जन्म समय के आधार पर किया जाता है। समय में थोड़ा-सा भी अन्तर पड़ जाने से लग्न के अशुद्ध हो जाने की सम्भावना रहती है, अतः लग्न की शुद्धता का विचार कर लेना आवश्यक है। लग्न की शुद्धता का विचार करने की एक सरल विधि यहाँ दी जा रही है। इसके आधार पर गलत लग्न वाली कुण्डली का बिना किसी विशेष परिश्रम के सुधार किया जा सकता है। विधि इस प्रकार है— उपस्थित जन्मकुण्डली के ग्रहों के फलादेश से यदि ज्ञात हो कि वह जातक के जीवन से ठीक मिल रहा है, तब तो कोई बात ही नहीं, परन्तु यदि फलादेश ठीक न मिले तो लग्न को अशुद्ध समझ कर दो कुण्डलियाँ ऐसी तैयार करनी चाहिए, जिनमें से एक में लग्न आगे की तथा दूसरी में पीछे की हो, फिर उन दोनों कुण्डलियों के विभिन्न भावों में उपस्थित कुण्डली के आधार पर ग्रहों को लिखकर उनके फलादेश का अध्ययन करें तथा जिस कुण्डली का फलादेश ठीक बैठता हो, उसी लग्न की कुण्डली को शुद्ध समझें। उदाहरण के लिए नीचे तीन कुण्डली-चित्र दिये जा रहे हैं। उपस्थित कुण्डली 'वृश्चिक' लग्न की है, जिसे बीच में प्रदर्शित किया गया है। पहली तथा तीसरी उसी के आधार पर धनु तथा मकर लग्न की कुण्डलियाँ दिखाई गई हैं। इन तीनों कुण्डलियों में से जिसका फलादेश जातक के जीवन पर ठीक-ठीक घटे, उसी की लग्न शुद्ध समझनी चाहिए। 'धनु' लग्न की कुण्डली | 'वृश्चिक' लग्न की कुण्डली | 'मकर' लग्न की कुण्डली चित्र १२१ | चित्र १२२ | चित्र १२३ इन उदाहरण-कुण्डलियों में जिस प्रकार लग्न को बदल कर उसके आधार पर विभिन्न भावों में विभिन्न ग्रहों को बैठाया गया है, इसी आधार पर किसी भी गलत लग्न वाली कुण्डली को शुद्ध किया जा सकता है।