भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८० विभिन्न लग्नों वाली जन्मकुण्डलियों का फलादेश जानने की विधि इस द्वितीय खण्ड में विभिन्न लग्नों वाली कुण्डलियों के विभिन्न भागों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का वर्णन अलग-अलग उदाहरण-कुण्डलियों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक लग्न की उदाहरण कुण्डलियों को अलग-अलग अध्यायों में बाँट कर, विभिन्न ग्रहों के फलादेश को सूर्यादि के क्रम से अलग-अलग लिखा गया है। किस लग्न वाली कुण्डली का फलादेश किन संख्याओं वाली उदाहरण कुण्डलियों में देखना चाहिए, इसे निम्नानुसार समझ लें— १. 'मेष लग्न'—उदाहरण-कुण्डली संख्या ११६ से २२३ तक २. 'वृष' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या २२५ से ३३२ तक ३. 'मिथुन' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या ३३४ से ४४१ तक ४. 'कर्क' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या ४४३ से ५५० तक ५. 'सिंह' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या ५५२ से ६५९ तक ६. 'कन्या' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या ६६१ से ७६८ तक ७. 'तुला' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या ७७० से ८७७ तक ८. 'वृश्चिक' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या ८७९ से ९८६ तक ९. 'धनु' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या ९८८ से १०९५ तक १०. 'मकर' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या १०९७ से १२०४ तक ११. 'कुम्भ' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या १२०६ से १३१३ तक १२. 'मीन' लग्न—उदाहरण-कुण्डली संख्या १३१५ से १४२२ तक यह बात पहले बताई जा चुकी है कि जन्मकुण्डली में स्थित ग्रहों का जातक के जीवन पर स्थायी प्रभाव पड़ता है, परन्तु तात्कालिक गोचर कुण्डली के ग्रह भी उसके जीवन पर अपने स्थितिकाल में अस्थायी प्रभाव डालते रहते हैं। अतः जिस समय जो ग्रह जिस राशि पर चल रहा हो, उसके बारे में पंचांग अथवा किसी ज्योतिषी द्वारा जानकारी प्राप्त करके तात्कालिक प्रभाव के विषय में भी अवश्य जान लेना चाहिए। उदाहरण के लिए 'सूर्य' किसी जातक की मेष लग्न वाली जन्मकुण्डली के द्वितीय भाव में बैठा है तो वह उदाहरण-कुण्डली संख्या ११७ के अनुसार जातक के जीवन पर अपना स्थायी प्रभाव डालता रहेगा। परन्तु जब वह तात्कालिक गोचर में मिथुन राशि पर चल रहा होगा, तब जातक के ऊपर मेष लग्न वाली कुण्डली के, मिथुन राशि वाले तृतीय भाव में स्थित सूर्य के अनुसार उदाहरण-कुण्डली संख्या