भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८३ 'मेष' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में 'सूर्य' का स्थायी-फलादेश उदाहरण कुण्डली-संख्या ११६ से १२७ के बीच देखना चाहिए । २—'मेष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ११६ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ११७ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ११८ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ११९ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १२० (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १२१ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १२२ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १२३ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १२४ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १२५ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १२६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १२७ 'मेष' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १२८ से १३९ के बीच देखना चाहिए । २—'मेष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस दिन 'चन्द्रमा'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १२८ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १२९ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १३० (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १३१ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १३२