भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८४ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १३३ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १३४ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १३५ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १३६ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १३७ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १३८ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १३६ 'मेष' लग्न में 'मंगल' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'मंगल' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १४० से १५१ के बीच देखना चाहिए। २—'मेष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'मंगल' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'मंगल'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १४० (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १४१ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १४२ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १४३ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १४४ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १४५ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १४६ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १४७ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १४८ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १४६ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १५० (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १५१ 'मेष' लग्न में 'बुध' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १५२ से १६३ के बीच देखना चाहिए। २—'मेष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए—