भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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८७ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १६२ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १६३ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १६४ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १६५ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १६६ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १६७ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १६८ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १६९ 'मेष' लग्न में 'राहु' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'राहु' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या २०० से २११ के बीच देखना चाहिए। २—'मेष' लग्न वालों को अपनी गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'राहु' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'राहु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या २०० (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या २०१ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या २०२ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या २०३ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या २०४ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या २०५ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या २०६ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या २०७ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या २०८ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या २०९ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या २१० (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या २११ 'मेष' लग्न में 'केतु' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'केतु' का स्थायी-फलादेश उदाहरण कुण्डली संख्या २१२ से २२३ के बीच देखना चाहिए :