भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८६ 'मेष' लग्न में 'शुक्र' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १७६ से १८७ के बीच देखना चाहिए। २—'मेष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १७६ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १७७ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १७८ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १७९ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १८० (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १८१ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १८२ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १८३ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १८४ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १८५ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १८६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १८७ 'मेष' लग्न में 'शनि' का फलादेश १—'मेष' लग्न वालो को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का स्थायी-फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १८८ से १९९ के बीच देखना चाहिए। २—'मेष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'शनि'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १८८ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १८९ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १९० (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १९१