बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)
Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(divided by zero), it becomes infinite! Brilliant! That is Nārāyaṇa Paṇḍita's Bījagaṇitāvataṃsa! "शून्याभ्यासवशात् खतामुपगतो राशिः पुनः खोद्भूतो" "व्यावृत्तिं पुनरेति तन्मयतया न प्राक्तनीं गच्छति ।" "आत्माऽभासवशादनन्यममलं चिद्रूपमानन्ददं" "प्राप्य ब्रह्मपदं न संसृतिपदं योगी गरीयानिव ॥"
Let's verify line 28: व्यावृत्तिं पुनरेति तन्मयतया न प्राक्तनीं गच्छति ।
Line 29: आत्माऽभासवशादनन्यममलं चिद्रूपमानन्ददं
Line 30: प्राप्य ब्रह्मपदं न संसृतिपदं योगी गरीयानिव ॥"
Now let's re-verify the fraction in line 18-19:
Let's see lines 17-19:
Line 17:
अथ याव १ अयं वर्गो यदि शू-येन विभज्यते तदा लब्धिरनन्ता पूर्वयुक्त्या-
Wait, look at शू-येन: is it शू-येन or शून्येन?
There is a hyphen: `शू-