बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)

बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)
Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा
DevanagariHindipublished152 पृष्ठ
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संक्षिप्तविषयाः । १३५ अ₃/क₃ = (ल अ₂ + अ₁) / (ल क₂ + क₁), वास्तवभिन्न च ल, स्थाने ल + इ, इत्यस्योत्थापनेन जातम् = ((ल + इ) अ₂ + अ₁) / ((ल + इ) क₂ + क₁), इ = रूपाऽपसंख्या । अतः भिन्न - अ₂/क₂ = (ल.अ₂ + इ अ₂ + अ₁) / (ल.क₂ + इ क₂ + क₁) - अ₂/क₂ = (ल क₂ अ₂ + इ क₂ अ₂ + क₂ अ₁ - ल क₂ अ₂ - इ क₂ अ₂ - क₁ अ₂) / (क₂ (ल क₂ + इ क₂ + क₁)) = (क₂ अ₁ - क₁ अ₂) / (क₂ (ल क₂ + इ.क₂ + क₁)) = १ / (क₂ { क₂ (ल + इ) + क₁ }) एव अ₃/क₃ - भिन्न = (ल अ₂ + अ₁) / (ल क₂ + क₁) - (ल अ₂ + अ₁ + अ₂ इ) / (ल क₂ + क₁ + क₂ इ) = (ल² क₂ अ₂ + ल क₂ अ₁ + ल क₂ अ₂ इ + ल क₁ अ₁ + अ₁ क₁ + अ₁ क₂ इ
- ल² क₂ अ₂ + ल क₂ अ₁ + ल क₂ अ₂ इ + ल अ₂ क₁ + अ₁ क₁ + क₁ अ₂ इ) / (क₃ (ल क₂ + क₁ + क₂ इ)) = इ (अ₁ क₂ - क₁ अ₂) / (क₃ (ल क₂ + क₁ + क₂ इ)) = इ / (क₃ (ल क₂ + क₁ + क₂ इ)) प्रथमान्तरस्यांशमानादस्या परस्यांशमानमल्पं तदीयहरमानादस्य हरमान चाधि- कमत उन्नत आसन्नमानानि सूक्ष्माणि वास्तवभिन्नस्य निकटस्थत्वादिति स्थितिः । अथैषां सिद्धान्तानां सूत्राणि । आसन्नमानस्य हरांशमाने अग्रं विगुण्य गदिते क्रमेण । पृष्ठस्थिताग्रहरांशकाभ्यां तदा हराशी भवतोऽग्रिमस्य ॥ १ ॥ द्व्यग्रप्रमाणयोराग्रप्रबन्धयोरेकतरं भवेत् । अग्रस्थाने राशौ रूपं निन्यमेतच्च धीमता ॥ २ ॥ सर्वोत्त्वासन्नमानेषु हरांशी भवतो रटौ । तयोत्तरोत्तरं सूक्ष्म आसन्नमानानि भवन्ति हि ॥ ३ ॥ इष्यते- अ/क, इदमग्रप्रमाणं वास्तवभिन्नात् सिद्धिमियम्- रा/र -अग्रं विभज्य हर-