बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)
Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमेण प्रथमखण्डमानानि प्र., दि., तृ., च., प्रथमसममापमान=वि, द्विती" Wait! Look at line 31: "तथा क्रमेण प्रथमखण्डमानानि प्र., दि., तृ., च., प्रथमसममापमान=वि, द्विती-" Wait, the second word in line 31: "तथा क्रमेण" - 'क्र' has a broken loop, looks like '' or 'क्र'. It's "क्रमेण"! Then: "प्रथमखण्डमानानि प्र., दि., तृ., च., प्रथमसममापमान=वि, द्विती" (or "प्रथमसमापमान = वि, द्वि") Wait, let's read line 31 carefully: "तथा क्रमेण प्रथमखण्डमानानि प्र., दि., तृ., च., प्रथमसममापमान=वि, द्विती-" (with a hyphen or broken off at right: "द्विती-")
Line 32: "यसमपंमान = वि, तदाऽऽल्पाणुमारेण" Wait! "यसमपंमान = वि, तदाऽऽल्पाणुमारेण" -> "यसमापमान = वि, तदाऽऽल्पानुसारेण" (or "यसमापमान = वि₂, तदाऽऽल्पानुसारेण"? No, "वि, तदाऽऽल्पाणुमारेण" or "तदाऽऽल्पानुसारेण").