बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)
Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें->तौorयौ? तौmakes so much sense withयदा ... तदा ... कल्पितौ तौ! Or यौ? Wait, let's look at ये: it has au-kara! तौorयौ`.
Now let's revisit L24 and L25 (Verse 1):
Let's read verse 1 carefully:
Line 1:
निरग्रं पदं यद्गुणात् स्यात् फलाढ्यं
Wait, look at L23:
निरग्र पद यद्गुणात् स्यात् फलाढ्यं -> wait, does it have anusvara?
निरग्र पद or निरग्रं पदं?
In print, sometimes anusvara is faint or omitted: निरग्र पद यद्गुणात् स्यात् फलाढ्यं
Wait, let's look at L24:
धनाख्यं तदेवात्र शेषं तदग्रम् ।
Line 2:
धनाख्यं तदेवात्र शेषं तदग्रम् ।
Line 3 (L25):
पदाद्यं धनं शेषहृत्प्रान्त्यमन्त्यं
Wait, let's look at the letters of L25:
प दा द्यं (पदाद्यं)
ध नं (धनं)
शे ष हृ त्प्रान् त्य (