भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

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  • २ - प्राप्त हस्तलिखित प्रतियों का परिचय [ १ ] नाम--बीसलदेप रासो। कागज-देशी (हाथ का बना हुआ)। पत्र-२७ पत्र, दोनों तरफ लिखे हुए। आकार-११ ई. x ५ ई । पंक्तियाँ--१५ से १६ पंक्तियाँ प्रत्येक पृष्ठ पर। पद्य संख्या-२४६। प्रकार- पुराना, पूर्ण; साधारणतया ठीक। अक्षर-देवनागरी। सुरक्षित स्थान-जोधपुर में पोकरण के पास फलौदी के श्रीयुक्त फूलचन्द जी छाबर के पास। [ गुप्त स० समूह क्र० ३, सकेत ग० ] पुष्पिका-इति श्री वीसलदे रास समाप्त। संवत् १६३३ वर्षे वैशाष वदि १२ दिने आदित्यवारे। लिषतं आगरा मध्ये पं० सोढा लिषतं । संपूर्णं । आदि-स्वर का नदन त्रिभुवन सार। नादभेदहू शारह उत्तर भण्डार। एक दन्तउ मुषिक सहस्रद। सुविकट धाइण तिलक संदूरि । कर मोडी नरपति भणइ । जाणि करि रोहिणी हिमकण्ठ सूरि ॥ अंत-कनक काया जिसी क्रूर रोख। कठिन पयोधर रतनउ थोक। केलि सरभ सी कू घणी। चालइ पूषणउ पाचइ नीक। मोडिकोट चालहू गोहरी। ठाकुरी विरह वेदना नां सहह कोइ । जिउ राजा राणी मिल्या । स्यउ नाहड कड़इ मिलि ज्यो सह कोइ ॥ २४६ ॥ रचना तिथि-संवत् सहससतिहत्तरह जानि। नवह कविमरि कही अमृत वाणि। गुण शुन्य चंडहाण का सुकछ पक्ष पंचमी श्रावण मास। रोहणी नक्षत्र सोहामण्ड । सो दिन तिथि जोइसा जोडह रास। टि०-प्राप्य तिथियुक्त प्रतियों में यही सबसे प्राचीन है। [ २ ] नाम-राजा वीसलदे रासा। कागज-देशी [ गुप्त स० समूह न० १५, सकेत म० ] (हाथ का बना हुआ), पत्र-सोलह पत्र दोनों तरफ लिखे हुए। आकार-८ ३/४ ईं० x ५ ईं.। पंक्तियाँ-२६ पंक्तियाँ प्रत्येक पृष्ठ पर। पद्यसंख्या-६२४। प्रकार-पुराना, पूर्ण,