भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 164, कुल 315 में से

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पृष्ठ 164
  • ५८ - सा^१ किय^२ पगसुं^३ टेख्खित्तह। इसीय मारि निखि कह धरि वास ॥ इसीय न देख पुवक्षी। कवलनयण^४ धण परोय^५ सुमीठ^६ ॥ दई^७ निपाई^८ घिह घढी। म्दे तउ इसीतिगे न रचियजतृ दीठ ॥ ७९ ॥ आजुली^९ होइ^१० नइ पावइ^११ पद्यताइ । दृय^१२ कह^१३ नाह मनाउपड^१४ जाइ ॥ परहर^१५ मूहइ^१६ यर^१७ पाइ^१८। १+२. अ० २ ते नांउ, आ० ६ तोदि, आ० १२ सो क्युं । ३ अ० ६ पग सिउं, आ० १२ पगस्युं । ४. अ० २ नयण छलुणो, आ० १२ सरणनयण । ५+६. अ० २ बचन सुमीत, आ० १२ अरु परोय सुमीठ । ७+८. अ० २ दईव नस्याली, आ० १२ दाईव निराई । यह छंद अ० २ रूट २ में ३८, आ० ६ रूढ २ में ३५, आ० ६ में ८३ तथा आ० १२ में ७६ है। इस छंद की ४ थी और पांचवी पंक्तियां आ० ६ में इस प्रकार हैं— ४ असीय न रामतणै रहे वास । ५. असीय विधाता घढि सकि ॥ तथा आ० १२ में ८ वीं पंक्ति है—इसीय नारिय रचियतै दीठ । ९. अ० २ आछो, आ० १२ आजकुली । १०. अ० होइ । ११. अ० २ नइ पद्यै, आ० ६ पदी, आ० १२ नै । १२+१३. अ० २ नार मोलायउ, मार बोलायद्द आ० १२ में केवल 'दृव' है । १४. अ० २ धन कवन मुखि, आ० ६, हूँकिण मुचि, आ० १२ नाइ नमनावणी । १५. आ० ६ हरि । १६. अ० २ पूजो होइ, आ० ६ पुज्योहोय । १७+१८ अ० चाहूदे, आ० ६ बाहुडइ, आ० ६ परि पाहये ।
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