बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
DevanagariHindipublished315 पृष्ठ
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- ८१ - साशीय , मंत्री जिहा छह राय । देग पधारउ करउ¹ पसाव ॥ राणी बुलावइ थानइ रायजी । तब इसि चडीयउ राय चउआण² ॥ साधि चउरासीया साझता³ । सहस किरण जाणे उगीयउ⁴ भाण ॥ भानमती दुवारिइ⁵ आयोउ⁶ राइ⁷ । राणीजी⁸ मन माहे कीयउ सुभाइ⁹ ॥ रतन कंचण दीयउ बइसणउ१० । तठइ राजा वीसल करइ छह११ जुहार ॥ राणी आसीस दइ राय जी१२ । तउ चिरंओविजे सं परिवारि ॥ १. आ० ६ करीय, आ० १२ जाकरै । २. आ० ६ तब इसि हयवर चढयउ चहुआण आ० १२ तब इसी नै हयवर चढ्यो चौहाण । ३. आ० १२ साधता । ४. आ० ६ उग्ग्यो, आ० १२ उगीयौ । यह छंद आ० ६ में ११५, आ० १२ में १०२ है । इस छंद की पहिली पंक्ति आ० १२ में है—"आवियो मनी प जिहा अच्छे राय ।" ५. आ० १२ दुवारै । ६. आ० १२ आयीयौ । ७ आ० १२ राउ । ८ आ० १२ राणी । ६. आ० १२ कियो सुभाउ । १०. आ० १२ बैसणै । ११. आ० १२ करै । १२. आ० १२ घी राउजी । यह छंद आ० ६ में ११६, आ० १२ में १०३ है । इस छंद की अन्तिम पंक्ति आ० १२ में है:—"ते चिरंजीवे हौ स्यउ परिवार ।"