भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 315 में से

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पृष्ठ 188
  • ८२ - तठइ राणी आँ पूषइ¹ गुण की बात । विणु विधि भाषीया कोस सद्द मान ॥ साविधि इमसु ये कहठ² । म्हावित छह उलंग की धाउ³ । चामरी करियां राउ की⁴ दृथि⁵ परि मोलह⁶ वीसल राउ ॥ धाउ मति बात⁷ कहउ मत राइ । उलंग कउ मिसि⁸ कहउ था९ काइ ॥ साचउ कहउ म्हासुं तुम्है¹⁰ । थांकइ नृपधणी सांवरि उमहइ देव ॥ राज या निक थजमेर मांहि¹¹ । राजा सो किउ करइ पराइय सेव ॥ १. आ० ६ तठे राणी यूझइ छह, आ० १२ सठै राणीजी यूझै । २. आ० १२ साविधि ये इमसु कहौ । ३. आ० १२ ताव । ४. आ० १२ रावली ५. आ० ६ दूख ६. आ० ६ मोलियउ, आ० १२ बोलै । यह छन्द आ० ६ में ११७ आ० १२ में १०४ है । ७. आ० ६ तुम्हि बात, आ० १२ था तुम्हैं बात । ८. आ० ६ डलग मिसि करो, आ० १२ उलिग फउ मिस । ९. आ० ६ ये कहउ कांह, आ० १२ ये करौ । १०. आ० १२ साँच कहौ इमसु तुम्हे । ११. आ० ६ राजा थाको बैठणो गढ़ अजमेर, आ० १२ राज यानिक अजमेर महूँ । यह छंद आ० ६ में ११८, आ० १२ में १०५ है । इस छंद की अंतिम पंक्ति आ० १२ में है:—"सो किम करै पराई सेव ।"
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