बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
DevanagariHindipublished315 पृष्ठ
पृष्ठ 233, कुल 315 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 233
- १२७ - भानमती बोलइ गुणि¹ राइ । एता दिन² संभालीयउ³ काइ ॥ इतमी हो आरति⁴ राज की⁵ । किडतह आज पूछीया⁶ इ⁷॥ भाव भलहूँ⁸ आणिकिज्यो । खंडि खुटियउ⁹ हो¹⁰ सिगण्ड परिहार ॥१८५॥ तब हसि हरि राजा आलिंगण देहि । भानमती मुख¹¹ कहठ सुखह¹² ॥ राजमती विधि मोप्प्यउ¹³ । खोरी दे यभण दीयउ पदारि ॥ १. आ० १२ गुणी जी । २. आ० १२ इवना दिवस । ३. आ० १२ न साभरि । ४. आ० १२ इतनी आरति । ५. आ० १२ राजा क्यु करी । ६ + ७ आ० ६ पूछीया कीधीय सार ४ ८. आ० १२ भावि मैले । ९. आ० १२ खुप्पी छै । १०. आ० (में नहीं है) । यह छंद आ० ६ में १८६ तथा आ० १२ में १६६ है । लेकिन इसमें चौथी और पाँचवीं पंक्तियाँ इस प्रकार हैं :— ४. आज किड पूछियड किउ फरोसार । ५. भाव भलेते मानिज्यो । आ० १२ में पंक्ति है :—"किभ पूछीयो ये इव कीधीय सार ॥" ११. आ० १२ सुभत्तु । १२. आ० १२ कहोएसु । १३. आ० १२ मोकल्यो ।