बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
DevanagariHindipublished315 पृष्ठ
पृष्ठ 274, कुल 315 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 274
- १६६ - कनक काया मिली¹ कूं कूं रोल²। कठिन पयोधर रतन³ कचोल॥ केलि गरभ जिसी कूं पली⁴। घीलइ⁵ घण जब पीचइ नीक⁶॥ मोडिकवि चालइ⁷ गोरडी। उण की विरह वेदना⁸ ना सहइ कोइ॥ मिउं राजा राखी⁹ मिया¹⁰। रयण¹¹ नाहल कहइ¹² मिलिओ सहु कोइ¹³॥२४६॥ १. अ० २ घट। २. अ० २, आ० ६ कूं कूं लोल, आ० ६ कूं को रोल। ३. आ० १३ हेम। ४. आ० ६ कूं पली, आ० १२ रूप की आगली। ५. आ० १२ घील। ६. आ० १२ जब घण मोडै नाक। ७. आ० ६ फा चालउ, आ० १२ कडिमौडै चालै। ८. आ० ६ वेदन। ९. अ० २, आ० ६ राणीसु। १०. अ० २, आ० ६ मिलियो। ११. अ० २ म, आ० ६ (में नहीं है) आ० ६ द्यु, आ० १२ सु। १२. अ० २, आ० ६ इणी कवि, आ० ६ नल्ह कहै, आ० नाहल कहै। १३. अ० २, आ० ६ सन कोइ। यह छं० अ० २ पाट ३ में १०१, आ० ६ खड ३ में ६६, आ० ६ में २४८ तथा आ० १२ में २४२ है। ॥ समाप्त ॥