बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ - १७७ - स्थित है। इस स्थान के पास एक गुफा है जिसमें की खुदी हुई मूर्ति नाहड़राव की (रघुवंशी प्रतिहार) मूर्ति बतलायी जाती है। यह गुफा देखने में बहुत प्राचीन नहीं जान पड़ती लेकिन इसके पास वाले एक चबूतरे से दसवीं सदी के लेख का एक टुकड़ा प्राप्त हुआ है, जिसमें प्रतिहार कवक के पुत्र का नाम मिलता है, जो इस समय राजपूताने के अजायबघर में सुरक्षित है। इस गुफा के ऊपरी भाग में गुप्त लिपि में कुछ व्यक्तियों के नाम अंकित हैं। मंडोर के भग्नावशेषों में एक जैन मन्दिर भी है, जो दसवीं सदी का प्रतीत होता है। उसके उत्तर-पूर्व में एक स्थान है जो "रावल की चोरी" कहलाता है। मंदोदरी नाम से "मंडोर" की समानता होने के कारण कुछ लोगों ने रावण के विवाह होने आदि की कल्पना भी कर डाली है। लेकिन यह कल्पना कोरी कल्पना ही है। तथ्य का अंश इसमें नहीं के समान है। मंडोर पहले पहल नागवंशी क्षत्रियों के अधीन रहा होगा जैसाकि उसके पास के नागकुण्ट, नागाद्री नदी, अहिरौल आदि नामों से अनुमान किया जाता है। फिर वह प्रतिहारों के अधिकार में गया और उनसे राठौड़ों को दहेज मे मिला। मंडोर के सम्बन्ध में राजपूताना गजेटियर भाग २, पृ० २६१-६२ में प्राचीन राजाओं के स्मारकों का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि "Little respect or reverence is shown towards spots which in western countries, as cemetries are considered sacred in the present day. Many of the cenetophs are homes for beggar; and even the pariah dog; and nothing is done towards repairing the monuments erected to those who were heroes in their day. चांबल-चंबल चंबल नदी राजपूताने की सबसे बड़ी नदी है। यह मध्य भारत के इन्दौर राज्य (मऊ की छावनी से ६ मील दक्षिण पश्चिम) से निकलती है और ग्वालियर, इन्दौर तथा सीतामऊ राज्यों में बहकर राजपूताने में प्रवेश करती हुई भैसरोडगढ़ (मेवाड़), कोटा, केशवराव, पाटन और धौलपुर के निकट बहती हुई संयुक्त-प्रदेश में इटावा से २५ मील दक्षिण-पश्चिम यमुना से जा मिलती है। इस नदी की पूरी लम्बाई ६५० मील है। इसका पुराना नाम "चर्मण्वती" था। सोरठ-सुराष्ट्र-सौराष्ट्र ह्वेनस्यांग के वर्णन के अनुसार 'सुलब्ध या सुराथ' देश वल्लभी के अधीन था। इसकी राजधानी वल्लभी के पश्चिम में ५०० ली अथवा ८३