भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

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  • १६२ - द्विजिय लंकामपि वर्तते या, यस्याश्च नायात्यलकापि साम्यम् । वैकुण्ठ पुरी मप्यपरास्ति याया, धारेति नाम्नाकुल राजधानी ॥ अर्थात् परमार राजाओं की राजधानी धार 'लंका' और 'अलकापुरी' से भी श्रेष्ठ है । इसके सम्मुख विष्णु की राजधानी भी हेय ठहरती है । इसी प्रकार 'विक्रमांक देव चरित' का रचयिता विह्लण कहता है :— भोजः क्ष्माभृतमग्रणी न गणिस्तस्य साम्य नरेन्द्रैः सद्यत्प्रत्यह मिति भवतानागतं हा हतास्मि । यस्य द्वारोतुंग शिखर प्रोंट पारावतानाम्, नादव्याजादिनि स्वररुयं व्यामहारैव पाय ॥ अर्थात् जिस धार नगर के अधिपति पृथ्वी के अन्य राजाओं द्वारा सम्मानित राजा भोज थे, जिसके यश का वर्णन राजप्रासाद के उच्च शिखर पर बैठे पारा- वत गण भी करते थे, खेद है, मैं उस नगर में नहो गया । अर्जुन वर्म के संस्कृत नाटक में जो 'धार' की 'भोजशाला' में पीछे से प्राप्त हुआ था, धार नगरी के सम्बन्ध में लिखा है कि यह नगर राजप्रासादों, मन्दिरों, उच्चविद्यालयों तथा नाट्यशालाओं से सुशोभित था । अल्बरूनी ने इस नगर का उल्लेख अपनी यात्रा के वर्णन में १० वीं शती में किया है । सन् १३३३ में जब इब्नबतूता ने भारत भ्रमण किया था, उसने भी धार नगरी का उल्लेख करते हुए लिखा है कि मालवा का प्रधान नगर था । वाक्पति राज (९७३-६६७), सिन्धुराज (६६७-१०१०) तथा राजा भोज ( ११०१०-०५५) के राज्य-काल में धार भारतवर्ष भर में शिक्षा का केन्द्र समझा जाता था । जैसलमेर जैसलमेर अक्षांश २६ ५ और २८ २४ उत्तर तथा देशान्तर ६६ ३० एव ७२ ५० पूर्व में स्थित है । पूर्व पश्चिम तक इसकी लम्बाई १७२ मील तथा उत्तर से दक्षिण तक इसकी चौड़ाई १३६ मील है। इसके उत्तर में भावलपुर का राज्य, पूर्व में बीकानेर और मारवाड़, दक्षिण में मारवाड़ तथा पश्चिम में सिन्धु है । इसका पूरा क्षेत्रफल १६, ४४७ स्क्वायर मील है । यह नगर पूर्ण रूप से रेगिस्तान है । जैसलमेर के स्थापित करने वाले भाटी वंश के प्रसिद्ध राजा देवराज कहे जाते हैं । इन देवराज के सम्बन्ध में कहा जाता है कि सन् ८३६ म इनके जन्म