बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
DevanagariHindipublished315 पृष्ठ
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कि उपर्युक्त विद्वानों में से किसी ने यह बताने का कष्ट नहीं दिया कि किस आधार पर उन लोगों ने गणना की। इण्डियन एफीमेरीज के विद्वान् लेखक ने गणना कर विभिन्न संवतों के जो दिन और नक्षत्र आदि दिये हैं उसके अनुसार चैत्रादि के १२०२ की जेठ बदी ६ को शुक्रवार "शतभिषक्" नक्षत्र पड़ता है तथा कार्त्तिकादि से प्रारम्भ होने वाले इस संवत् की जेठ बदी ६ को शुक्रवार हस्त नक्षत्र पड़ता है।¹ इस संवत् के पाठ का जो दूसरा अर्थ १२१२ लगाया गया है उसके सम्बन्ध में भी उप- युक्त पुस्तक में जो उल्लेख प्राप्य है उसके अनुसार चैत्रादि जेठ बदी ६ को बृहस्पतिवार और रेवती नक्षत्र तथा कार्त्तिकादि जेठ बदी ६ को बुधवार और हस्त नक्षत्र था²। इस गणना की दृष्टि से आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और श्री सत्यजीवन वर्मा का यह मत कि संवत् १२१२ में जेठ बदी ६ को बुधवार पड़ता है, ठीक है। इन संवतों के अतिरिक्त एक संवत् १३७७ भी प्राप्य है। इस संवत् के साथ तिथि, वार तथा नक्षत्र सभी दिया हुआ है। अतः गणना करने में बड़ी सुविधा है। गणना करने पर चैत्रादि संवत् के अनुसार विक्रम संवत् १३७७ श्रावण सुदी ५ को रेवती नक्षत्र और शनिवार था तथा कार्त्तिकादि संवत् के अनुसार उक्त तिथि को अश्विनी नक्षत्र और बृहस्पतिवार आता है³। इस तरह यह संवत् भी अशुद्ध ठहरता है। इस संवत् का दूसरा अर्थ १३०७ भी लगाया गया है। गणना करने पर चैत्रादि संवत् १३०७ श्रावण शुक्ल ५ को बुधवार तथा "ह० भाद" पड़ता है एवं कार्त्तिकादि संवत् १३०७ "अर्थात् चैत्रादि १३०८" श्रावण शुक्ल ५ को मंगलवार और अश्विनी नक्षत्र पड़ता है⁴। उपर्युक्त प्राप्य हस्तलिखित प्रतियों में उल्लेख किये गये विभिन्न संवतों की गणना का निष्कर्ष यह निकला कि संवत् १२०२ के पाठ का अर्थ १२१२ निकालने पर और कार्त्तिकादि से इस संवत् का प्रारम्भ मानने पर जेठ बदी ६ को बुधवार पड़ता है जो कि संवत् १६६३ वाली प्रति में दिये गये पाठ का लगाया गया अर्थ है; लेकिन इसे मानने में इस संवत् के साथ नक्षत्र के उल्लेख का अभाव तथा इस प्रति के चार खण्डों में विभाजित होने के कारण इसके प्रामाणिक होने में सन्देह तथा बारह से बहोत्तरा का लगाया गया अर्थ १२१२,
1 Indian Ephemaries vol IV, P. P 32, 34 2 ,, ,, vol III, P P 312, 314. 3 ,, ,, vol IV, P. P. 243, 245 4. ,, ,, vol IV, P. P. 103, 105.