बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
DevanagariHindipublished315 पृष्ठ
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- १८ - हैं। अतएव यह सिद्ध होता है कि विग्रहराज और बीसलदेव एक ही पुरुष नहीं थे। इसके अतिरिक्त पृथ्वीराजरासा में लिखा है कि जिस समय बीसलदेव गुज- रात के चालुक्य राजा से लड़ने गये तो राजा भोज का लड़का उदयादित्य उनके साथ था। बीसलदेव रासो के अनुसार बीसलदेव ने भोज परमार की कन्या से विवाह किया था और इस भोज का समय डा० राजेन्द्र लाल मित्र के अनुसार सन् १०२१-१०८३ के बीच में होता है—पृथ्वीराजरासो से यह पता चलता है कि बीसलदेव की एक प्रमार वंशीय रानी थी, क्योंकि आदि पर्व में यह दोहा मिलता है :- ऊँच धाम बिसराम किय रहा बाल चतुरङ्ग। क्रीड़ा महल पधौर संवे पदिय सुकथा प्रमङ्ग॥ चन्द बीसलदेव का समय संवत् ८२१ देता है (पण्ड्या जी के सम्मत् विक्रम संवत् के अनुसार यह ६११ होगा) और यह लिखा है कि बीसलदेव ने ६४ वर्ष राज्य किया था। अतएव इस गणना के अनुसार बीसलदेव की मृत्यु का संवत् ९७५ (९१९ ई०) होगा जबकि राजा भोज और उसके पुत्र उदयादित्य का जन्म भी नहीं हुआ था; परन्तु ऐसा जान पड़ता है कि लेख के भ्रम से यह संवत् ८२१ अशुद्ध छपा है क्योंकि एक-दूसरे स्थान पर चन्द चालुक्य राज पर बीसलदेव की चढ़ाई और गुजरात विजय का समय ९८६ बताता है। इसलिए ऐसा जान पड़ता है कि बीसलदेव का समय ८२१ न होकर ९२१ होगा। यह समय (६२१-९१+६४ = १०७६ या १०२० ई०) भोज और उसके पुत्र उदयादित्य से भी ठीक ठीक मिल जाता है और इन दोनों का समकालीन होना सम्भवत सिद्ध हो जाता है। पण्डित मोहनलाल विष्णुलाल जी पंड्या का कथन है कि राजपूताने की ख्यातियों में १२१ के स्थान पर ६३१ मिलता है। यदि यह संवत् ठीक है तो बीसलदेव का समय १०१० मानना चाहिए। इतिहास में बीसलदेव का नाम इसलिए प्रसिद्ध है कि उसने कई बार मुसलमानों के विरुद्ध लड़ाई ठानी थी और एक बार उन्हें पुन' भारतवर्ष से निकालने में वह सफल मनोरथ हुआ था। इससे उसी युद्ध का आशय है जो राज- पूताने के राजाओं ने मुहम्मद गज़नवी (६६०-१०३०) के विरुद्ध ठाना था और जिसमें ये कृतकार्य हुए थे। जो बातें ऊपर कही गयी हैं इनसे यही सिद्ध होता है कि बीसलदेव बारहवीं शती में नहीं हुआ परन्तु ग्यारहवीं शताब्दी के