भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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* वाराहतीर्थ, कुशावर्त, नीलगङ्गा और कपोततीर्थकी महिमा * १५७

पुरुषार्थ करके गङ्गाजीकी भी कृपा प्राप्त की। महादेवजीसे प्राप्त हुई गङ्गाको पाकर उन्होंने उनकी परिक्रमा की और हाथ जोड़कर कहा— 'देवि! महामुनि कपिलके शापसे मेरे पितर

दुर्गतिमें पड़े हुए हैं। माता! आप उनका उद्धार करें।'

देवनदी गङ्गा सबका उपकार करनेवाली हैं। वे स्मरणमात्रसे सब पापोंका नाश कर देती हैं। उन्होंने भगीरथकी प्रार्थना सुनकर 'तथास्तु' कहा और लोकोंका उपकार एवं पितरोंका उद्धार करनेके लिये भगीरथके कथनानुसार सब कार्य किया। राजा सगरके जो पुत्र भस्म होकर रसातलमें पड़े थे, उन्हें अपने जलसे आप्लावित करके गङ्गाजीने उनके खोदे हुए गड्ढेको भर दिया। महामुने! इस प्रकार तुम्हें क्षत्रिया गङ्गाका वृत्तान्त सुनाया। ये माहेश्वरी, वैष्णवी, ब्राह्मी, पावनी, भागीरथी, देवनदी तथा हिमगिरिशिखराश्रया (हिमालयकी चोटीपर रहनेवाली) आदि नामोंसे पुकारी जाती हैं। इस प्रकार महादेवजीकी जटामें स्थित गङ्गाका जल दो स्वरूपोंमें विभक्त हुआ। विन्ध्यगिरिके दक्षिणभागमें जो गङ्गा हैं, उन्हें गौतमी (गोदावरी) कहते हैं और विन्ध्यगिरिके उत्तरभागमें स्थित गङ्गा भागीरथी कहलाती हैं।


वाराहतीर्थ, कुशावर्त, नीलगङ्गा और कपोततीर्थकी महिमा;

कपोत और कपोतीके अद्भुत त्यागका वर्णन

नारदजीने कहा— भगवन्! आपके मुखसे कथा सुनते-सुनते मेरे मनको तृप्ति नहीं होती। पहले गौतम ब्राह्मणके द्वारा लायी हुई गङ्गाका वर्णन कीजिये। उनके पृथक्-पृथक् तीर्थोंके फल, पुण्य तथा इतिहासपर भी क्रमशः प्रकाश डालिये।

ब्रह्माजी बोले— नारद! गोदावरीके पृथक्-पृथक् तीर्थों, फलों और माहात्म्योंका पूरा-पूरा वर्णन न तो मैं कर सकता हूँ और न तुम सुननेमें ही समर्थ हो; तथापि कुछ बतलाता हूँ। जहाँ भगवान् त्र्यम्बक गौतमके सामने प्रत्यक्ष प्रकट हुए थे, वह तीर्थ त्र्यम्बकके नामसे प्रसिद्ध है (वही गौतमी गङ्गाका उद्गमस्थान है)। वह भोग और मोक्ष देनेवाला है। दूसरा वाराहतीर्थ है, जो तीनों लोकोंमें विख्यात है। उसका स्वरूप बतलाता हूँ। पूर्वकालकी बात है, सिन्धुसेन नामक राक्षस देवताओंको परास्त करके यज्ञ छीनकर रसातलमें जा पहुँचा। यज्ञके रसातल चले जानेपर पृथ्वीपर उसका सर्वथा अभाव हो गया। देवताओंने सोचा, यज्ञके बिना न तो यह लोक रह जायगा और न परलोक ही; अतः अपने शत्रुके पीछे उन्होंने