भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished434 पृष्ठ

पृष्ठ 26, कुल 434 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 26

२४ * संक्षिप्त ब्रह्मपुराण *

कि विक्रयके लिये इसके गलेमें रस्सी बँधी हुई है; तब उस धर्मात्माने दया करके महर्षि विश्वामित्रके उस पुत्रको छुड़ा लिया और स्वयं ही उसका भरण-पोषण किया। ऐसा करनेमें उसका उद्देश्य था महर्षि विश्वामित्रको संतुष्ट करके उनकी कृपा प्राप्त करना। महर्षिका वह पुत्र गलेमें बन्धन पड़नेके कारण महातपस्वी गालवके नामसे प्रसिद्ध हुआ।

राजा सगरका चरित्र तथा इक्ष्वाकुवंशके मुख्य-मुख्य राजाओंका परिचय

लोमहर्षणजी कहते हैं—राजकुमार सत्यव्रत भक्ति, दया और प्रतिज्ञावश विनयपूर्वक विश्वामित्रजीकी स्त्रीका पालन करने लगा। इससे मुनि बहुत संतुष्ट हुए। उन्होंने सत्यव्रतसे इच्छानुसार वर माँगनेके लिये कहा। राजकुमार बोला—'मैं इस शरीरके साथ ही स्वर्गलोकमें चला जाऊँ।' जब अनावृष्टिका भय दूर हो गया, तब विश्वामित्रने उसे पिताके राज्यपर अभिषिक्त करके उसके द्वारा यज्ञ कराया। वे महातपस्वी थे, उन्होंने देवताओं तथा वसिष्ठके देखते-देखते सत्यव्रतको शरीरसहित स्वर्गलोकमें भेज दिया। उसकी पत्नीका नाम सत्यरथा

था। वह केकयकुलकी कन्या थी। उसने हरिश्चन्द्र नामक निष्पाप पुत्रको जन्म दिया। राजसूय-यज्ञका अनुष्ठान करके वे सम्राट् कहलाये। हरिश्चन्द्रके पुत्रका नाम रोहित था। रोहितके हरित और हरितके पुत्र चञ्चु हुए। चञ्चुके पुत्रका नाम विजय था। वे सम्पूर्ण पृथ्वीपर विजय प्राप्त करनेके कारण विजय कहलाये। विजयके पुत्र राजा रुरुक हुए, जो धर्म और अर्थके ज्ञाता थे। रुरुकके वृक, वृकके बाहु और बाहुके सगर हुए। वे गर अर्थात् विषके साथ प्रकट हुए थे, इसलिये उनका नाम सगर हुआ। उन्होंने भृगुवंशी और्वमुनिसे आग्नेय अस्त्र प्राप्तकर तालजङ्घ और हैहय नामक क्षत्रियोंको युद्धमें हराया और समूची पृथ्वीपर विजय प्राप्त की। फिर शक, पह्लव तथा पारदोंके धर्मका निराकरण किया।

**मुनियोंने पूछा—**सगरकी उत्पत्ति गरके साथ कैसे हुई? उन्होंने क्रोधमें आकर शक आदि महातेजस्वी क्षत्रियोंके कुलोचित धर्मोंका निराकरण क्यों किया? यह सब विस्तारपूर्वक सुनाइये।

**लोमहर्षणजीने कहा—**राजा बाहु व्यसनी थे, अतः पहले हैहय नामक क्षत्रियोंने तालजङ्घों और शकोंकी सहायतासे उनका राज्य छीन लिया। यवन, पारद, काम्बोज तथा पह्लव नामके गणोंने भी हैहयोंके लिये पराक्रम दिखाया। राज्य छिन जानेपर राजा बाहु दुःखी हो पत्नीके साथ वनमें चले गये। वहीं उन्होंने अपने प्राण त्याग