संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 44, कुल 434 में से
संदर्भ में पढ़ें४२ * संक्षिप्त ब्रह्मपुराण *
सुभद्राके नामसे विख्यात हुई। वसुदेवके देवकीके गर्भसे महायशस्वी भगवान् श्रीकृष्ण अवतीर्ण हुए। बलरामके रेवतीके गर्भसे निशठ उत्पन्न हुए, जो माता-पिताके बड़े लाड़ले थे। सुभद्राके अर्जुनके सम्बन्धसे महारथी अभिमन्यु उत्पन्न हुआ। वसुदेवजीकी परम सौभाग्यशालिनी सात पत्नियोंसे जो पुत्र उत्पन्न हुए, उनके नाम बतलाता हूँ; सुनो। शान्तिदेवाके भोज और विजय, सुनामाके वृकदेव और गद तथा त्रिगर्तराजकन्या वृकदेवीके महात्मा अगावह नामक पुत्र हुए।
क्रोष्टुके एक और पुत्र महायशस्वी वृजिनीवान् हुए। उनके पुत्र स्वाहि थे। स्वाहिके पुत्र राजा उषद्गु हुए, जिन्होंने प्रचुर दक्षिणावाले अनेक महायज्ञोंका अनुष्ठान किया था। उषद्गुके पुत्र चित्ररथ हुए, चित्ररथके शशबिन्दु, शशबिन्दुके पृथुश्रवा, पृथुश्रवाके अन्तर, अन्तरके सुयज्ञ तथा सुयज्ञके उषत् हुए। उषत्का अपने धर्मके प्रति बड़ा आदर था। उषत्के पुत्र शिनेयु, शिनेयुके मरुत्, मरुत्के कम्बलबर्हिष्, कम्बलबर्हिष्के रुक्मकवच, रुक्मकवचके परजित् तथा परजित्के पाँच पुत्र हुए—रुक्मेषु, पृथुरुक्म, ज्यामघ, पालित तथा हरि। पालित और हरिको पिताने विदेह प्रान्तकी रक्षामें नियुक्त कर दिया। रुक्मेषु पृथुरुक्मकी सहायतासे राजा हुए। इन दोनों भाइयोंने राजा ज्यामघको घरसे निकाल दिया। तब वे वनमें आश्रम बनाकर रहने लगे। उस समय शान्तिपरायण राजाको ब्राह्मणोंने बहुत कुछ समझाया। तब वे धनुष लेकर रथपर आरूढ हो दूसरे देशमें गये। अकेले ही नर्मदाके तटपर जाकर उन्होंने मेकला, मृत्तिकावती तथा ऋक्षवान् पर्वतको जीतकर शुक्तिमती नगरीमें निवास किया। ज्यामघकी पत्नी शैब्या थी, जो पतिव्रता होनेके साथ ही बड़ी प्रबल थी। यद्यपि राजाको कोई पुत्र नहीं था, तथापि उन्होंने पत्नीके भयसे दूसरी स्त्रीसे विवाह नहीं किया। एक बार किसी युद्धमें विजयी होनेपर उन्हें एक कन्या मिली। उसे रथपर बैठी देख स्त्रीने पूछा—'यह कौन है?' तब वे डरकर बोले—'यह तुम्हारी पुत्रवधू है।' यह सुनकर रानी बोली—'मेरे तो कोई पुत्र नहीं, फिर यह किसकी पत्नी होनेसे पुत्रवधू हुई?' यह सुनकर ज्यामघने कहा—'तुम्हें जो पुत्र उत्पन्न होगा, उसके लिये यह पत्नी प्रस्तुत की गयी है।' तत्पश्चात् रानी शैब्याने कठोर तपस्या करके एक विदर्भ नामक पुत्र उत्पन्न किया। उसका विवाह उक्त राजकन्यासे हुआ। उसके गर्भसे क्रथ और कौशिक नामक पुत्र उत्पन्न हुए। वे दोनों बड़े ही शूर तथा युद्धविशारद थे। उसके बाद विदर्भके भीम नामक पुत्र हुआ। उसके पुत्रका नाम कुन्ति हुआ। कुन्तिसे धृष्टका जन्म हुआ, जो संग्राममें धृष्ट और प्रतापी था। धृष्टके आवन्त, दशार्ह तथा विषहर नामक तीन पुत्र हुए, जो बड़े धर्मात्मा और शूरवीर थे। दशार्हके व्योमा और व्योमाके