भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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५० * संक्षिप्त ब्रह्मपुराण *

प्रदेशोंके लोग बड़े भाग्यशाली एवं हृष्ट-पुष्ट हैं। उन सबका निवास भारतवर्षमें ही है। महामुने! सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग—ये चार युग इस भारतवर्षमें ही होते हैं, अन्यत्र कहीं नहीं होते। यहीं पारलौकिक लाभके लिये यति तपस्या करते, यज्ञकर्ता अग्निमें आहुति डालते तथा दाता आदरपूर्वक दान देते हैं। जम्बूद्वीपमें मनुष्य सदा अनेक यज्ञोंद्वारा यज्ञमय यज्ञपुरुष भगवान् विष्णुका यजन करते हैं। अन्य द्वीपोंमें दूसरे प्रकारकी उपासनाएँ हैं। महामुने! जम्बूद्वीपमें भी भारतवर्ष सबसे श्रेष्ठ है; क्योंकि यह कर्मभूमि है और अन्य देश भोगभूमि हैं। यहाँ लाखों जन्म धारण करनेके बाद बहुत बड़े पुण्यके संचयसे जीव कभी मनुष्य-जन्म पाता है। देवता यह गीत गाते हैं कि 'जो जीव स्वर्ग और मोक्षके हेतुभूत भारतवर्षके भूभागमें बारंबार मनुष्यरूपमें उत्पन्न होते हैं और फलेच्छासे रहित कर्मका अनुष्ठान करके उन्हें परमात्मस्वरूप श्रीविष्णुको अर्पण कर देते हैं, वे धन्य हैं।* जो इस कर्मभूमिमें उत्पन्न हो सत्कर्मोंद्वारा अपने अन्तःकरणको शुद्ध करके भगवान् अनन्तमें लीन होते हैं, उनका जीवन धन्य है। हमें पता नहीं, इस स्वर्गलोककी प्राप्ति करानेवाले पुण्यलोकके क्षीण होनेपर हम फिर कहाँ देह धारण करेंगे। वे मनुष्य, जो भारतवर्षमें जन्म लेकर सम्पूर्ण इन्द्रियोंसे सम्पन्न हैं, धन्य हैं।' विप्रवरो! यह नौ वर्षोंसे युक्त जम्बूद्वीपका वर्णन किया गया। उसका विस्तार एक लाख योजन है तथापि यहाँ संक्षेपसे ही बताया गया है। जम्बूद्वीपको गोलाकारमें चारों ओरसे घेरकर खारे पानीका समुद्र स्थित है। उसका विस्तार भी एक लाख योजन है।


प्लक्ष आदि छः द्वीपोंका वर्णन और भूमिका मान

लोमहर्षणजी कहते हैं—जिस प्रकार जम्बूद्वीप खारे पानीके समुद्रसे घिरा हुआ है, उसी प्रकार उस समुद्रको भी घेरकर प्लक्षद्वीप स्थित है। जम्बूद्वीपका विस्तार एक लाख योजन बताया गया है। प्लक्षद्वीपका विस्तार उससे दुगुना है। प्लक्षद्वीपके स्वामी राजा मेधातिथिके सात पुत्र हुए। उनमें ज्येष्ठ पुत्रका नाम शान्तमय है। उससे छोटे क्रमशः शिशिर, सुखोदय, आनन्द, शिव, क्षेमक तथा ध्रुव हैं। ये सभी प्लक्षद्वीपके राजा हुए। इन्हींके नामपर उस द्वीपके सात वर्ष हैं। उनकी सीमा बनानेवाले सात ही वर्षपर्वत हैं। उनके नाम बतलाता हूँ, सुनो। गोमेद, चन्द्र, नारद, दुन्दुभि, सोमक, सुमना तथा वैभ्राज—ये सात वर्षपर्वत हैं। इन रमणीय पर्वतोंपर देवताओं और गन्धर्वोंसहित वहाँकी प्रजा निवास करती है। उन सबमें पवित्र जनपद हैं, वीर पुरुष हैं। वहाँ किसीकी मृत्यु नहीं होती। मानसिक चिन्ताएँ तथा व्याधियाँ भी नहीं सतातीं। वहाँ हर समय सुख मिलता है। प्लक्षद्वीपके वर्षोंमें सात ही ऐसी नदियाँ हैं, जो समुद्रमें जा मिलती हैं। अनुतप्ता,


* अत्रापि भारतं श्रेष्ठं जम्बूद्वीपे महामुने। यतो हि कर्मभूरेषा यतोऽन्या भोगभूमयः।
अत्र जन्मसहस्राणां सहस्रैरपि सत्तम्। कदाचिल्लभते जन्तुर्मानुष्यं पुण्यसञ्चयात्॥
गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ये भारतभूमिभागे। स्वर्गापवर्गास्पदेहेतुभूते भवन्ति भूयः पुरुषा मनुष्याः॥
कर्माण्यसंकल्पिततत्फलानि संन्यस्य विष्णौ परमात्मरूपे।
(१९। २३—२६)